||सुंदरता लघुकथा ||
एक घर में दो बहने थी दोनों की ही स्वरूप और सीरत के साथ गुणों की चर्चाएं होती रहती थी साथ ही दोनों ने शिक्षा भी अच्छी प्राप्त कर रखी थी तो फूलों की सुगंध को जिस प्रकार सीमित नहीं रहती है वैसे ही इनके गुणों की चर्चा भी दूर-दूर तक होने लगी और परिस्थिति वश उनके लिए रिश्ते भी आने लगे , ऐसे ही व्यक्ति को अनुकूल समझ कुछ समय पश्चात दोनों का विवाह भी तय हो गया समय बिता और विवाह के कुछ समय पश्चात अक्सर दोनो अपनी बाते सांझा करती थी किन्तु जब दोनों प्रत्यक्ष मिली तो दोनों के स्वरूप में बहुत ज्यादा अंतर आ गया था और जब दोनों ने अपने अपने बारे में वास्तविकता के साथ बताना शुरू किया दोनो ही अपने स्वरूप को देख कर आश्चर्य चकित हो गई और यह होना स्वाभाविक भी था विवाह से पहले और आज में जो अंतर था उसका कारण दोनो ही जानना चाहती थी क्योंकि एक वह थी जिसके घर में सब अच्छे से व्यवहार करते थे साथ ही उनके गुणों का सम्मान करते थे और उनकी प्रशंसा भी करते थे तो घर की सकारात्मकता उनके स्वरुप को आलोकित करती थी और दूसरी तरफ सारा कार्य करने के बाद भी ना तो कोई गुणों का सम्मान किया जाता था और ना ही किसी प्रकार की प्रशंसा बल्कि इसके विपरीत अलग-अलग प्रकार के कटाक्ष किए जाते थे… व्यंग्य किए जाते थे तो माहौल की नकारात्मकता ने उनके आलोक को समय के साथ कम कर दिया यही कारण था कि दोनों के साथ होने वाला व्यवहार उनके स्वरुप में स्वरूप में अंतर कर गया था जबकि विवाह से पहले तो दोनों ही एक समान थी पर विवाह के बाद होने वाला अलग अलग व्यवहार दोनों के ऊपर एक गहरा प्रभाव छोड़ता गया जो कि उनके व्यवहार में पूर्णतया दिखाई दने लगा और सही भी है स्त्री की सुंदरता को सुशोभित श्रृंगार से अधिक दिया गया उचित सम्मान और प्रेम करता है ।
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