कुछ कहना काफी नहीं है
|| कुछ कहना || कुछ कहना या कुछ ऐसा करना जिससे किंही को पीड़ा पहुंचे न चाहते हुये भी और […]
|| कुछ कहना || कुछ कहना या कुछ ऐसा करना जिससे किंही को पीड़ा पहुंचे न चाहते हुये भी और […]
जिंदगी एक जिंदगी मे इंसान कितनी जिंदगियाँ जी लेता है कभी खुद के, कभी अपनों के, कभी हालातों के हिसाब
|| दम तोड़ती आशाएँ || कई बार सारी आशाएं समाप्त नजर आती है … ऐसा अनुभव होता है कि
भौतिकता या आत्मीयता हर चीज को भौतिक रूप में पाना ही हमे सबसे ज्यादा जरुरी लगता है किंतु हम
जीवन की व्यस्तता जीवन की व्यस्तता …… जीवन की व्यस्तता मे व्यक्ति इतना व्यस्त हो चुका है कि जीवन मे
वर्तमान विचार … आजकल सभी ने आधुनिकता को सिर्फ पहनावे तक ही नहीं विचारो तक अपनाया है, साधनो की बात
स्व-महत्वपूर्णता किसी से लगाव होना और फिर उस लगाव का बढ़ता जाना प्रेम है किन्तु प्रेम में कभी किसी के
|| बिछड़ना || बिछड़ना स्वयं से …जीवन में कितनी बार ऐसा हुआ है जब हम अपने भाव को छुपा लिया